पीएमएफएमई योजना ने रचा नया कीर्तिमान, दो लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को मिला ऋण
20,300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश, 11 लाख रोजगार सृजित; 44 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं
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,  नई दिल्ली, 11 जुलाई। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण (PMFME) योजना ने देश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को नई पहचान दिलाते हुए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। योजना के तहत दो लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को ऋण स्वीकृत किया जा चुका है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
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,  केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दो लाख से अधिक ऋण स्वीकृत होने के साथ ही योजना के माध्यम से 20,300 करोड़ रुपये से अधिक के परियोजना निवेश को गति मिली है। इससे देशभर में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है और लाखों छोटे उद्यमियों को अपने कारोबार का विस्तार करने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत करीब 90 प्रतिशत लाभार्थी प्रथम पीढ़ी के उद्यमी हैं, जो यह दर्शाता है कि सरकार नए उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में सफल रही है।
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,  पासवान ने बताया कि योजना के 44 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। उन्होंने इसे "महिला नेतृत्व वाले विकास" की दिशा में बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाएं अब स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की मजबूत नींव भी है।
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,  मंत्री ने बताया कि पीएमएफएमई योजना के माध्यम से 75 हजार से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां उद्यम आधार, उद्यम असिस्ट, एफएसएसएआई तथा जीएसटी जैसे पंजीकरणों के जरिए औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुकी हैं। इससे इन उद्यमों को सरकारी योजनाओं, वित्तीय संस्थानों और बाजार तक बेहतर पहुंच मिली है। योजना के परिणामस्वरूप देशभर में करीब 11 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।
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,  नई दिल्ली में आयोजित इस समारोह में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों, बैंकिंग संस्थानों, विकास सहयोगी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) तथा बड़ी संख्या में सूक्ष्म उद्यमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान योजना की उपलब्धियों पर आधारित विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया गया तथा लाभार्थियों ने अपने सफल उद्यमों की प्रेरक कहानियां साझा कीं। केंद्रीय मंत्री ने लाभार्थियों से संवाद करते हुए उनके अनुभव भी सुने।
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,  कार्यक्रम के स्वागत भाषण में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव देवेश देवल ने योजना के लिए देशव्यापी मल्टीमीडिया जागरूकता अभियान की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पीएमएफएमई योजना केवल वित्तीय सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, हैंडहोल्डिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, विपणन और बाजार से जोड़ने जैसी समग्र सुविधाएं भी उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि यह योजना स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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,  मंत्रालय के सचिव ए.पी. दास जोशी ने कहा कि यह उपलब्धि भारत में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि योजना वित्तीय सहायता, औपचारिककरण, आधुनिक तकनीक, क्षमता निर्माण और बाजार उपलब्धता को एक साथ जोड़कर छोटे उद्यमों को प्रतिस्पर्धी बना रही है। उन्होंने जिला संसाधन व्यक्तियों (DRPs) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे डिजिटल इंडिया और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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,  कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि योजना के 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)' मॉडल के तहत देशभर में मखाना, मोटे अनाज (मिलेट्स), मसाले और जीआई टैग उत्पादों सहित लगभग 200 उत्पादों के लिए 40 साझा ब्रांड विकसित किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान मिलने लगी है।
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,  चिराग पासवान ने बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के अगले विकास चरण की मजबूत नींव है। उन्होंने राज्यों की सरकारों, जिला प्रशासन, बैंकों और क्षेत्रीय अधिकारियों के योगदान की भी प्रशंसा की।
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,  मंत्री ने बताया कि योजना के सीड कैपिटल घटक के अंतर्गत 4.18 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को सहायता प्रदान की जा चुकी है। वहीं 27 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 80 कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 32 केंद्र संचालित हो चुके हैं। इसके अलावा 1.76 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें 77 प्रतिशत महिलाएं हैं। समारोह के दौरान झारखंड के रांची निवासी इंदरजीत सिंह को योजना के दो लाखवें लाभार्थी के रूप में सम्मानित करते हुए उन्हें ऋण स्वीकृति पत्र और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया।
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,  खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का मानना है कि दो लाख से अधिक क्रेडिट-लिंक्ड लाभार्थियों की यह उपलब्धि देश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को औपचारिक, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे न केवल लाखों लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी मिलेगी।