सहकारिता आंदोलन ने पांच वर्षों में बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर : अमित शाह
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद पिछले पांच वर्षों में देश के सहकारिता क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं। आज 55 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के माध्यम से 300 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि 39 हजार पैक्स किसान समृद्धि केंद्र और 639 जन औषधि केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं।
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,  सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि देशभर की 8.58 लाख सहकारी समितियों और 32 करोड़ से अधिक सदस्यों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया गया है, जिससे सहकारी संस्थाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।
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,  उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने लगभग तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से पैक्स के कंप्यूटरीकरण का कार्य पूरा किया है तथा 50 हजार से अधिक पैक्स को ई-पैक्स में परिवर्तित किया जा चुका है। इससे ई-ऑडिट, डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार हुआ है। साथ ही सहकारी बैंकों में डिजिटल बैंकिंग, ई-केवाईसी और साइबर सुरक्षा व्यवस्था लागू होने से जिला सहकारी बैंकों का कारोबार 19.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
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,  अमित शाह ने कहा कि कृषि, डेयरी, बीज उत्पादन, जैविक खेती, लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग, निर्यात और हरित ऊर्जा सहित नौ प्रमुख क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियों का गठन किया गया है। भारत बीज सहकारी समिति अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी बीज उत्पादन कंपनी बनने की दिशा में कार्य कर रही है, जिससे किसानों को उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होंगे।
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,  उन्होंने कहा कि सहकारिता मॉडल के माध्यम से जैविक खेती, सर्कुलर इकोनॉमी, गोबर प्रबंधन, जैविक उर्वरक और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के माध्यम से प्रशिक्षित पेशेवर तैयार किए जाएंगे, जिससे पैक्स से लेकर शीर्ष सहकारी संस्थाओं तक पेशेवर प्रबंधन, पारदर्शिता और कार्यकुशलता को बढ़ावा मिलेगा।
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,  कार्यक्रम में अमित शाह ने कई नई परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। इनमें अन्न भंडारण गोदाम, डिजिटल सहकारिता प्लेटफॉर्म, डेयरी क्षेत्र की नई पहलें तथा सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण से जुड़ी अनेक योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता आंदोलन सबसे मजबूत आर्थिक आधार के रूप में उभरेगा और इसका लाभ सीधे किसानों, पशुपालकों तथा ग्रामीण समाज को मिलेगा।