सहकारिता आंदोलन ने पांच वर्षों में रचा नया इतिहास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई मजबूती : अमित शाह
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद पिछले पांच वर्षों में देश के सहकारिता आंदोलन ने एक नया इतिहास रचा है। मंत्रालय ने न केवल सहकारी क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान की है, बल्कि इसे आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता आंदोलन सबसे मजबूत आर्थिक आधार बनेगा और इसका सीधा लाभ किसानों, पशुपालकों तथा ग्रामीण समाज को मिलेगा।
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,  नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि आज देश में 55 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के माध्यम से 300 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा 39 हजार पैक्स किसान समृद्धि केंद्र तथा 639 जन औषधि केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रेल टिकट बुकिंग, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण, सरकारी योजनाओं के आवेदन, डिजिटल भुगतान सहित अनेक सेवाएं गांव स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं।
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,  उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने लगभग तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से पैक्स के कंप्यूटरीकरण का कार्य पूरा किया है तथा 50 हजार से अधिक पैक्स को ई-पैक्स में परिवर्तित किया जा चुका है। इससे ई-ऑडिट, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था को बढ़ावा मिला है। सहकारी बैंकों में डिजिटल बैंकिंग, ई-केवाईसी और साइबर सुरक्षा व्यवस्था लागू होने से जिला सहकारी बैंकों का कारोबार 19.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है।
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,  अमित शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने देशभर की 8.58 लाख से अधिक सहकारी समितियों और 32 करोड़ से अधिक सदस्यों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया है। इससे राज्यों को नई सहकारी संस्थाओं की स्थापना, बेहतर योजना निर्माण और पारदर्शी प्रशासन में सहायता मिल रही है। उन्होंने कहा कि अब सहकारिता केवल कृषि ऋण तक सीमित नहीं है, बल्कि डेयरी, जैविक खेती, भंडारण, बीज उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग, निर्यात, डिजिटल सेवाओं और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों तक इसका विस्तार किया गया है।
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,  उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर नौ नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है, जो आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी सहकारी संस्थाओं के रूप में विकसित होंगी। भारत बीज सहकारी समिति अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी बीज उत्पादन कंपनी बनने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए जाएंगे तथा भारत को बीज उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
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,  गृह मंत्री ने कहा कि सरकार जैविक खेती, सर्कुलर इकोनॉमी, गोबर प्रबंधन, जैविक उर्वरक और नवीकरणीय ऊर्जा को सहकारिता मॉडल के माध्यम से बढ़ावा दे रही है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और जैविक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे उत्पादन क्षमता के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
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,  उन्होंने कहा कि त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना से सहकारिता क्षेत्र को प्रशिक्षित और पेशेवर मानव संसाधन मिलेगा। इससे पैक्स से लेकर शीर्ष सहकारी संस्थाओं तक कार्यकुशलता, पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा मिलेगा तथा भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
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,  कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण भी किया। इनमें अन्न भंडारण गोदाम, डिजिटल सहकारिता प्लेटफॉर्म, डेयरी क्षेत्र की नई पहलें, गोमय सहकारी समिति, सहकार सीबीएस प्लेटफॉर्म, एनडीडीबी की नई परियोजनाएं तथा 50 हजार पैक्स को ई-पैक्स में परिवर्तित करने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां शामिल हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारिता आंदोलन आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।