एआई शिखर सम्मेलन: आर्थिक कायाकल्प और वैश्विक सहयोग को नई दिशा
नई दिल्ली : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को वैश्विक आर्थिक वृद्धि का प्रमुख चालक बनाने की दिशा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में 88 देशों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भागीदारी और समर्थन दर्ज कराया। सम्मेलन में इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि एआई केवल तकनीकी नवाचार का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक कायाकल्प, सुशासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने वाला प्रमुख माध्यम है।
,  सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने एआई के बहुआयामी प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की। प्रतिभागियों ने माना कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रही है और एआई इस परिवर्तन का केंद्रीय तत्व बन चुका है। उत्पादन क्षमता बढ़ाने, लागत घटाने, नई नौकरियों के अवसर सृजित करने और नवाचार को गति देने में एआई की भूमिका निर्णायक मानी गई।
,  आर्थिक कायाकल्प में एआई की भूमिका
,  सम्मेलन में यह रेखांकित किया गया कि एआई आधारित समाधान विनिर्माण, वित्त, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता को कई गुना बढ़ा सकते हैं। डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली से न केवल दक्षता बढ़ेगी, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई वैश्विक जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देगा और विकासशील देशों के लिए भी नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।
,  ओपन-सोर्स और सुलभ एआई इकोसिस्टम पर जोर
,  सम्मेलन की प्रमुख चर्चा में ओपन-सोर्स और एक्सेसिबल एआई इकोसिस्टम की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि एआई के लाभ केवल चुनिंदा देशों या बड़ी कंपनियों तक सीमित रहेंगे, तो वैश्विक असमानता बढ़ सकती है। इसलिए खुले प्लेटफॉर्म, साझा डेटा संसाधन और सहयोगी अनुसंधान मॉडल को बढ़ावा देना अनिवार्य है। इससे नवाचार की गति तेज होगी और छोटे व मध्यम उद्यमों को भी प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा।
,  ऊर्जा-कुशल एआई अवसंरचना की आवश्यकता
,  एआई के बढ़ते उपयोग के साथ ऊर्जा खपत में भी वृद्धि हो रही है। सम्मेलन में इस चुनौती को स्वीकार करते हुए ऊर्जा-एफिशिएंट एआई अवसंरचना के विकास पर बल दिया गया। प्रतिभागियों ने हरित डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और कार्बन फुटप्रिंट कम करने वाली तकनीकों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखे बिना एआई का विस्तार दीर्घकालिक रूप से लाभकारी नहीं होगा।
,  विज्ञान, शासन और सार्वजनिक सेवा में विस्तार
,  सम्मेलन में एआई के सामाजिक प्रभावों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। स्वास्थ्य सेवाओं में रोग पहचान और उपचार की सटीकता बढ़ाने, शिक्षा में व्यक्तिगत शिक्षण मॉडल विकसित करने और कृषि में फसल पूर्वानुमान जैसे क्षेत्रों में एआई के उपयोग को सराहा गया। शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए डेटा एनालिटिक्स और स्वचालित प्रणाली के उपयोग पर भी सहमति बनी। सार्वजनिक सेवा वितरण में एआई आधारित प्लेटफॉर्म से समय और लागत की बचत होने की संभावना जताई गई।
,  वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता
,  सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों ने एआई शासन में साझा वैश्विक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस संदर्भ में स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी ढांचों को बढ़ावा देने की बात कही गई, ताकि विभिन्न देशों की नीतिगत विविधताओं का सम्मान करते हुए सहयोग को सुदृढ़ किया जा सके। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई की प्रकृति वैश्विक है, इसलिए इसके नियमन और विकास में अंतरराष्ट्रीय तालमेल आवश्यक है।
,  प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि दृष्टि (विजन) को क्रियान्वयन (एक्शन) में बदलने के लिए निरंतर संवाद, संयुक्त अनुसंधान और नीति-समन्वय जरूरी है। सम्मेलन से दीर्घावधि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को गति मिलने की उम्मीद जताई गई।
,  अंत में जारी घोषणा-पत्र को 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ। इस घोषणा में एआई को समावेशी, टिकाऊ और जिम्मेदार तरीके से विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है।
,  विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस शिखर सम्मेलन में लिए गए संकल्प प्रभावी ढंग से लागू किए जाते हैं, तो एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस अवसर का किस प्रकार उपयोग करता है और एआई को मानवता के व्यापक हित में कैसे रूपांतरित करता है।